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    Showing posts with label जालोर सिरोही. Show all posts

    अफसरों को नही हैं नोकरी की परवाह

    कैसा व्यवहार करते हैं आम लोगों के साथ

    सांसद ने आम आदमी बनकर किया फोन

    जालोर

    पुलिस के अफसर आम आदमी के साथ किस तरह से पेश आते हैं और वार्तालाप में किस तरह की भाषा का प्रयोग करते हैं इसका कड़वा अनुभव हुआ जालोर-सिरोही के सांसद देवजी पटेल को उस समय हुआ जब उन्होंने आम आदमी बन कर करड़ा थाना प्रभारी उप निरीक्षक गिरधरसिंह को फोन कर दिया। थानेदार जी ने केवल गाली-गलौच किया बल्कि धमकी भी दी।
    दरअसल पटेल ने 22 जून की देर रात करड़ा थाना प्रभारी को आम आदमी बनकर फोन पर शराब की दुकानें खुली रहने की शिकायत की। लेकिन थानेदार ने जमकर गालियां सुना दी। फि र दबंगई दिखाते हुए शराब की दुकानें यूं ही देर रात चालू रहने की धमकी दे डाली। दोनों की बातचीत का ऑडियो इंटरनेट पर वायरल होने के बाद पुलिस महानिरीक्षक जोधपुर रेंज ने थाना प्रभारी का तबादला जालोर से जैसलमेर कर दिया है।
    नौकरी की परवाह नहीं
    थानेदार ने फोन पर यहां तक कह दिया कि उसे नौकरी की कोई परवाह नहीं है। तू चाहे रिकॉर्डिग करके वसुंधरा या मोदी को बता दें, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है। भले तगारी-फावड़ा उठाना पड़े, लेकिन करड़ा थाना प्रभारी रहने की कोई इच्छा नहीं है। सांसद की ओर से हर बार साहब-साहब कह कर थानेदार को सम्बोधन किया गया, लेकिन थानेदार ने बातचीत के दौरान कईबार अपशब्द का उपयोग किया।
    मेरा ठेकों से कोई लेना-देना नहीं
    जब सांसद ने कहा कि साहब, मैंने तो सिर्फ शराब के ठेकों की शिकायत की है। इस थानेदार ने जवाब दिया कि मुझे ठेकों से कोई लेना-देना नहीं है। शराब की दुकान, तस्कर, चोर हो या कोई और मैं कोई मतलब नहीं रखता। यह करड़ा क्षेत्र है यहां कैसे लोग रहते हैं, तुझे पता होगा।

    ***************************

    बातचीत के अंश...

    सांसद : साहब मैं रिक्वेस्ट कर रहा हूं..
    थानेदार : मेरी बात सुन लें, मुझे नौकरी की परवाह नहीं है। रिकॉर्डिग करवा लें, एम.पी., वसुंधरा तो क्या भले ही मोदी को बता देना। मुझे नौकरी की जरूरत नहीं है। पेट्रोल पम्प वगैरा सब है। फिर अपशब्द..नहीं होगा तो तगारी-फावड़ा उठा लूंगा।
    सांसद : हां
    थानेदार : तू ज्यादा बात मत कर।
    सांसद : जी साहब
    थानेदार : बात को समझ, इतनी मत कर।
    सांसद : मैंने कोई फोन नहीं किया।
    थानेदार : थानेदारी की जरूरत नहीं है। अपशब्द..
    सांसद : साहब मैंने कुछ नहीं किया।
    थानेदार : बोली का ध्यान रख।
    सांसद : साहब मैंने आपको साहब साहब किया है। ठेके की शिकायत की है।
    थानेदार : ठेके 100 चालू रहेंगे। मेरा कोई मतलब नहीं है। अपशब्द.. मैं ना ठेके से मतलब रखता हूं। ना तस्करों से मतलब रखता हूं। ना चोरों से मतलब रखता हूं।
    सांसद : साहब आपकी बात सच्ची है।
    थानेदार : अपशब्द..मेरे को हटा दें, तेरे बाप का असल है तो, कल ही हटा दें। करड़ा थाने की जरूरत नहीं है।
    अरणाय में शराब ठेके के सैल्सकर्मी व नरिंगाराम नाम के एक व्यक्ति के बीच बहस हुई थी। इसको लेकर नरिंगाराम का पूर्व में फोन आया था। इसके बाद इसी नाम से सांसद ने फोन कर दिया, लेकिन मैंने किसी को कोई धमकी नहीं दी।
    -गिरधरसिंह, थाना प्रभारी, करड़ा

    शराब दुकान के सेल्समैन ने एक व्यक्ति के साथ मारपीट कर दी। जिस पर पीडित ने थानेदार को फोन लगाया, लेकिन थानेदार ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया। इसके बाद पीडित ने मुझे फोन लगाया। तो मैंने थानेदार के नम्बर लेकर आम आदमी बनकर फोन किया तथा गांव में शराब की दुकान खुली होने की शिकायत की, लेकिन थानेदार ने गाली-गलौच की। ऎसे में जाहिर होता है कि एक जिम्मेदार अधिकारी आम जनता के साथ किस तरह पेश आता है।

    -देवजी एम. पटेल सांसद, जालोर

    रमेश कुमार चौधरी जालौर

    हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामनाएँ


    केंद्रीय जल संसाधन मंत्री को ज्ञापन देते जालोर-सिरोही सांसद देवजी M पटेल

    केंद्रीय जल संसाधन मंत्री को ज्ञापन देते जालोर-सिरोही सांसददेवजी M पटेल