15 दिन में 15% फिसला क्रूड, 2 से 5 रुपए तक घट सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

नई दिल्ली। ग्रीस कर्ज संकट, चीनी की आर्थिक मंदी और ईरान के परमाणु समझौते के डर की वजह से क्रूड की कीमतों में भारी गिरावट आई है। पिछले 15 दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें करीब 15 फीसदी फिसल चुकी है। गिरावट का यह सिलसिला फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है और वहीं विशेषज्ञ मानते हैं कि कीमतें आगे 45 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल सकती हैं। क्रूड की कीमतों में आई गिरावट को देखते हुए तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 से 5 रुपए प्रति लीटर की कटौती कर सकती हैं। 1 जुलाई को पेट्रोल 31 पैसे सस्ता हुआ था। फिलहाल दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 66.62 रुपए प्रति लीटर है।

नायमैक्स पर डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतें 52 डॉलर प्रति बैरल के आसपार है। जबकि 23 जून को इसकी कीमत 61 डॉलर प्रति बैरल थी। वहीं ब्रेंट क्रूड की कीमतें फिसलकर डॉलर पर आ गई है।

2 से 5 रुपए तक सस्ता हो सकता है तेल
ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने मनी भास्कर से कहा कि क्रूड की कीमतों में अगर गिरावट जारी रहती है तो कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 से 2.5 रुपए प्रति लीटर की कटौती कर सकती हैं। तनेजा के मुताबिक क्रूड की कीमतें 50-75 डॉलर प्रति बैरल के बीच ही रहेंगी। वहीं 2015 के दौरान क्रूड की औसत कीमत 68 डॉलर प्रति बैरल रहने की संभावना है। हालांकि उन्होंने अगले दो-तीन वर्षों तक क्रूड की कीमतों में बड़ी तेजी से इंकार किया है।

एसएमसी ग्लोबल के रिसर्च हेड डॉ. रवि सिंह ने कहा कि पिछले एक महीने में क्रूड की कीमतों में 15 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। इसलिए क्रूड की कीमतों में 2-3 फीसदी की रिकवरी देखने को मिल सकती है। साथ ही अमेरिका में क्रूड की इन्वेंट्री घटने से भी कीमतों को सहारा मिलेगा। हालांकि इसका फंडामेंटल अभी भी कमजोर है। इसके कारण कारण क्रूड की कीमतें 48 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल सकता है। सिंह के मुताबिक क्रूड की कीमतों में आई गिरावट को देखते हुए तेल कंपनियां 5 रुपए प्रति लीटर तक पेट्रोल में कटौती कर सकती हैं। 

45 डॉलर तक फिसल सकता है क्रूड
गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक अक्टूबर तक क्रूड की कीमतें 45 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल सकती हैं। उन्होंने इसकी मुख्य वजह मजबूत डॉलर और ओवर सप्लाई को माना है। वहीं कमोडिटी गुरु के नाम से चर्चित जिम रोजर्स का मानना है कि छोटी अवधि में क्रूड की कीमतें 40 डॉलर तक आ सकती हैं। हालांकि उसके बाद कीमतें में अच्छी तेजी की उम्मीद है।

यूरो जोन के 18 में से 16 देश हैं ग्रीस के विरोध
डिफॉल्ट घोषित होने के बाद ग्रीस अब आर्थिक संकट से बाहर निकलने के लिए 2-3 दिन के भीतर नया प्रस्ताव सौंपेगा। प्रधानमंत्री एलेक्सिस तिसप्रास ने कहा कि हम मिलजुलकर इस ऐतिहासिक चुनौती से उबर सकते हैं। लेकिन इसके बाद भी ग्रीस कर्ज संकट कम होने के आसार नजर नहीं आ रहे है। ग्रीस के पीएम के संबोधन के बाद जर्मनी ने इस पर भारी निराशा जाहिर की। जर्मनी ने कहा कि वह यूरोपीय देशों और लेनदारों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अपने मंत्रियों को कम खर्च करने के लिए कहते तो बेहतर रहता। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक माना जा रहा है कि यूरो जोन के 18 में से 16 देश ग्रीस के विरोध में है। अब रविवार को यूरोपीय संघ के सारे 28 सदस्यों की बैठक इसी मुद्दे पर होगी। ग्रीस संकट से डॉलर में जोरदार तेजी आई है इससे क्रूड की कीमतों पर दबाव बन रहा है।

चीन की आर्थिक रफ्तार पड़ी धीमी
चीन की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ रही है। इससे छोटी अवधि में क्रूड की मांग घटने का खतरा है। चीन पिछले एक दशक से क्रूड की कीमतों में निर्णायक भूमिका निभा रहा है। वहीं चीन के शेयर बाजार रेग्युलेटर सीएसआरसी (चाइना सिक्युरिटीज रेग्युलेटरी कमीशन) के मुताबिक बाजार में पैनिक सेंटीमेंट है। बुधवार को चीन के प्रमुख इंडेक्स शंघाई कंपोजिट 5.9% गिरकर बंद हुआ। जबकि चीन के शेयर बाजार में पिछले तीन हफ्तों में करीब 30 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। चीन क्रूड के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा आयातक देश है।

ईरान परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता जारी
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर तेहरान और विश्व शक्तियों के बीच जारी वार्ता की अवधि शुक्रवार तक के लिए बढ़ा दी गई है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख फेडरिका मोघेरिनी ने कहा कि बेहद जटिल और संवेदनशील चरण में पहुंच चुकी बातचीत को कुछ और दिन जारी रखने का फैसला किया गया है। अगर ईरान पर लगे प्रतिंबध हट जाते हैं तो ग्लोबल बाजार में क्रूड की सप्लाई और बढ़ जाएगी। प्रतिबंध खत्म होने के 6 महीने के भीतर कच्चे तेल की सप्लाई अतिरिक्त 7 लाख बैरल बढ़ेगी। आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन होने की वजह से कच्चे तेल की कीमतों पर अधिक दबाव पड़ेगा।

अमेरिका और ओपेक की वजह से ओवर सप्लाई
अमेरिका और ओपेक देशों में क्रूड उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर है। जून में ओपेक का क्रूड उत्पादन 321.3 लाख बैरल प्रति दिन रहा है, जो अगस्त 2012 का उच्चतम स्तर है। 5 जून को हुई बैठक में ओपेक ने क्रूड उत्पादन में कटौती नहीं करने का फैसला किया था। वहीं अमेरिका में क्रूड उत्पादन 45 साल के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया है। दरअसल अमेरिका आत्मनिर्भर बनना चाहता है, जबकि ओपेक बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए उत्पादन बढ़ा रहे हैं। 2008 के वित्तीय संकट और तकनीकी में सुधार के कारण अमेरिका में क्रूड उत्पादन बढ़ा है। ग्लोबल क्रूड उत्पाद में ओपेक की 40 फीसदी हिस्सेदारी है।

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