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    Showing posts with label वीर शहीद. Show all posts

    श्रदांजलि सभा का आयोजन रविवार को

    अहमदाबाद 

    शहीद को दी श्रदांजलि

    नागाणी में जन्मे माँ भारती के सुपुत्र शहीद स्व. श्री रमेश कुमार चौधरी को स्थानीय श्री राजाराम जी आश्रम कालवाडी पुणे में श्रदांजलि दी गई। ज्ञात रहे कि रविवार 11 सितम्बर को जम्मू के पुंछ में आतंकवादियों से लड़ते लड़ते 5 आतंकवादियों को मार कर भारत माँ की रक्षा करते करते शहीद हुए सिरोही राजस्थान के नागणी गाँव के माँ भारती के सपूत शहीद स्व. श्री रमेश कुमार चौधरी को आज पुणे में 36 कॉम प्रवासी बंधुओं ने नम आँखों के शहीद को पुष्प अर्पित कर दो मिनिट का मौन रख कर श्रदांजलि दी।  जिसमे वनराज देवासी ने अपनी नम आँखों से शहीद की जीवनी पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्व. रमेश कुमार हमेशा बचपन से ही देश भक्ति की बाते करता था और जब भी गाँव आता था तब युवाओ में देश भक्ति की भावना पैदा करता था। श्रदांजलि सभा में लालाराम चौधरी, वनराज देवासी, केसाराम कलबी धानता, नगाराम देवासी, अम्रत चोधरी, हरजीराम चोधरी, बाबूजी सुथार, कृष्णाराम चोधरी,  छोगाराम भूरिया, दिलीप चौधरी, मदन चोधरी, रूपाराम चोधरी, गोविन्द चोधरी, तेजाराम चोधरी, रणछोड़ाराम, जेताराम पुनाव, मगन चोधरी, रघुनाथ चौधरी, कमलेश, हेमाराम, सवाराम, गोदाराम, भेराराम, अग्राराम एवं लुम्भा राम सहित 36 कॉम के सेकड़ो प्रवासी बंदु उपस्थित थे। 
    समाचार के लिए केसाराम धानता

    हर आंख नम थी, बहन बोली- रोएं नहीं देश के लिए अमर हुआ है मेरा भाई


    • सैन्य सम्मान से हुआ शहीद रमेश चौधरी का अंतिम संस्कार, शवयात्रा में जुटे 10 हजार से अधिक लोग 
    • पिता ने शव को चूमकर नम आंखों से दी अंतिम विदाई, बेटी ने संभाला कहा उसका भाई अमर हुआ 
    सेना, पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं ने पुष्प चक्र अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि देते हुए 

    रेवदर जम्मू कश्मीर के पूंछ इलाके में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए रमेश कुमार चौधरी का पार्थिव शरीर मंगलवार सवेरे 8 बजे पैतृत्व गांव नागाणी पहुंचा। तिरंगे में लिपटे शव को देखकर हर किसी की आंखे नम हो गई। शव आने से एक पहले रिश्तेदारों ने माता-पिता को उनके बेटे के शहीद होने जानकारी दी थी। जैसे ही शव घर पहुंचा। शिव को देखकर घर की चौखट पर खड़े पिता फफक पड़े। माता दलू देवी का हाल भी बुरा था। बड़ी बहन गंगा देवी ने नम आंखों पिता बाबूलाल को संभाला। उसने कहा कि कोई रोए नहीं मेरा भाई अमर हुआ है। उसने पिता से कहा कि उनके बेटे ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। देखिए, उनके बेटे के सम्मान हजारों लोग जुटे हैं। बेटी की बात सुनकर पिता ने अपने आप को संभाला तथा बेटे का माथा चूमकर अंतिम विदाई दी।
    एकरात पहले माता-पिता को बताया कि उनका बेटा शहीद हो गया : रमेश चौधरी के शहीद होने की जानकारी माता-पिता को नहीं दी गई थी। शहीद के पिता बाबूलाल रोजाना की तरह कुएं पर काम करने जाते थे और माता दलू देवी घर का काम संभालती थी। जम्मू कश्मीर शव लेने गए बड़े भाई कसनाराम ने भी छोटे भाई विजय और चेचेरे भाईयों को सच बताया था। सोमवार रात करीब 10 बजे माता-पिता को सच बताया तो उनका रो रोकर हाल बुरा हो गया। सवेरे तिरंगे में लिपटे शव को देखकर माता-पिता की आंखे भर आई, लेकिन बेटी गंगा देवी और अन्य परिजनों ने उनको संभाला। 
    शव यात्रा में सांसद देवजी पटेल सहित हजारों लोगो ने पुष्प वर्षा  शहीद विदाई दी 
    पुष्प वर्षा से शहीद को विदाई गांव के मुख्य मार्ग से गुजरी शवयात्रा का ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा से स्वागत कर शहीद को अंतिम विदाई दी। गली-मोहल्लों से लेकर घर की छतों पर खड़े लोगों ने शहीद को नमन किया। शहीद के ताबूत को फूल मालाओं से लाद दिया। शहीद रमेश चौधरी अमर रहे के जयकारों ने वातावरण देश भक्ति के रंग में रंग दिया। 
    शहीद को श्रदांजलि देने पहुंचे हजारों लोग, डेड किलोमीटर लंबी थी शव यात्रा 

     भाई ने मुखाग्नि दी शवयात्रा के मुक्तिधाम पहुंचने पर सेना ने गार्ड ऑफ आर्नर दिया। सेना, पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं ने पुष्प चक्र अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि दी। शहीद के बड़े भाई कसनाराम ने शव को मुखाग्नि दी। इस मौके गोपालन राज्यमंत्री ओटाराम देवासी, सांसद देवजी पटेल, विधायक समाराम गरासिया, पूर्व विधायक संयम लोढ़ा, तारा भंडारी, पीसीसी महासचिव नीरज डांगी, भाजपा जिलाध्यक्ष लुंबाराम चौधरी, प्रधान पंूजाभाई मेघवाल, भाजयुमो जिलाध्यक्ष हेमंत पुरोहित, उपजिलाप्रमुख कानाराम चौधरी, लूणी विधायक जोगाराम पटेल, यूआईटी चैयरमैन सुरेश चौधरी, बार एसोसिएशन अध्यक्ष महेंद्र सिंह राव, जय सिंह राव, लकमाराम कोली, एसपी संदीप सिंह चौहान, एडीएम प्रहलाद सहाय नागा, एसडीएम रामचंद्र गरवा समेत कई प्रबुद्धजन मौजूद रहे।

    शहीद के बड़े भाई कसनाराम ने शव को मुखाग्नि दी

    जानिए वीर शहीद श्री चौधरी के जीवन के बारे में

    शहीद रमेश के साथ अपने फुर्सत के क्षण बिताने वाले उनके रिश्तेदारों और करीबी मित्रों ने सबगुरु न्यूज को बताया कि वह हमेशा कहता था कि जम्मू कश्मीर में जीवन की अनिश्चितता है। ऐसे में इस दौरान शादी करता है और उसे कुछ हो जाता है तो किसी लडक़ी के जीवन के साथ खिलवाड़ और अन्याय होगा।

    रमेशकुमार को जितना सम्मान अपनी मातृभूमि और परिवार के लिए था, उतना ही सम्मान नारी शक्ति के रूप में उनकी अर्धांगिनी बनने वाली युवती के प्रति भी था। इसी का परिणाम था कि वह जम्मू-कश्मीर के अनिश्चितता भरे माहौल में पोस्टिंग के दौरान शादी नहीं करना चाहता था। रमेश ने अपने मित्रों को बताया था कि बीएसएफ में सेवाकाल में चार साल जम्मू कश्मीर में निकालना होता है, वह चार साल पूर्ण करते ही जैसे ही अन्य स्थान पर पोस्टिंग होगी वह शादी करेगा।


    -कैसे कहें पिता से कि देश पर न्योछावर हो गया भाई
    शहीद रमेश कुमार की शहादत ने जिलेवासियों को गौरवांवित किया हो, लेकिन नौ महीने कोख में रखकर अपने बेटे के लिए सपने बुनने वाली मां और बेटे के जीवन को लेकर हर पल चिंतित रहने वाले शहीद के पिता बाबूराम को अभी भी यह दुखद हादसा छिपाया गया है।

    रमेशकुमार के बड़े भाई को कसनाराम को शनिवार को ही यह सूचना मिल गई थी और वह नम आंखों से अपने शहीद भाई के पार्थिव शरीर को लाने के लिए जम्मू कश्मीर चला गया। रमेश के चचेरे भाई प्रेमाराम ने बताया कि शहीद के मां-बाप को यह बताने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं कि उनका बेटा देश के काम आ गया है।

    इसलिए दोनों को दो अलग-अलग अरठ में बने मकानों में रखा गया है। तीन भाइयों में रमेश सबसे छोटा भी था और मिलनसार व मृदुभाषी होने के कारण सबका प्रिय भी। मंझला भाई वजाराम पुणे में काम करता है और वहां से रवाना हो गया है। रमेश की मंगेतर वजाराम की साली ही है। ऐसे में मातम पोसिन्द्रा में उसके ससुराल में भी फैला होगा। रमेश की शहादत की सूचना पर उसकी मंगेतर के तो सपनों को साकार होने से पहले ही तोड़ दिया होगा।

    government collage sirohi from where martyr ramesh completed his graduation

    -कहकर गया था कि शादी में आना
    शहीद रमेश कुमार एक महीने पहले सिरोही में ही था। 15 अगस्त को भी यही थे। पामेरा में पटवारी के रूप में तैनात उनके मित्र नानाराम ने बताया कि हाल ही मे सिरोही आने पर वह उनसे सिरोडी मे मिले थे। दोनों वहां पर मोटरसाइकिल की सर्विसिंग करवाने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान दो मित्र और साथ में थे। सभी ने वहां नाश्ता किया।

    रमेशकुमार ने नानाराम को उसके बडे भाई की गत वर्ष अप्रेल में हुई शादी में नहीं आने पर शिकायत भी दर्ज करवाई। साथ ही अगले साल होने वाली उनकी शादी में आने के लिए समय रिजर्व करने को भी कहा। नानाराम चौधरी ने बताया कि रमेशकुमार ने एक दिन झरने में नहाने का कार्यक्रम बनाने को भी कहा और उनको अपने सिरोही के नम्बर भी दिए। नानाराम ने बताया कि रविवार को रमेश की शहादत को सुनकर पूरी रात बेचैन रहे और हर पल उसके साथ हॉस्टल और उसके बाद बिताए हुए पल याद आते रहे।

    martyr ramesh chaudhari during his posting in jammu and kasmir

    -कभी खौफ नहीं दिखा आंख में
    जम्मू कश्मीर में पोस्टिंग का सुनकर हर एक मित्र और रिश्तेदार एक बारगी वहां पर जीवन की अनिश्चितता को लेकर सिहर उठता था, लेकिन वहां की बातें करके शहीद रमेश कुमार के चेहरे पर शिकन तक नहीं आती थी। नागाणी के ही विद्यालय में नवी तक उनके साथ पढाई करने वाले डूंगराराम ने बताया कि वह हमेशा ही आर्मी में जाने का इच्छुक था।

    जम्मू में पोस्टिंग पर मौत का भय आंख में कभी दिखा नहीं। जबकि हमेशा यह आत्मविश्वास था कि उन्हें हमेशा सतर्क रहना पड़ता है और वह हमेशा आतंकवादियों से सामना करने के लिए तैयार रहते हैं।

    -माता-पिता नहीं थे सेना में भेजने को तैयार
    रमेशकुमार के माता-पिता उसके आर्मी में जाने के निर्णय पर तैयार नहीं थ्ी, लेकिन देश के प्रति उसकी भावना के आगे उन्हें भी मजबूर होना पड़ा। हाल ही में सिरोही आने पर भी माता-पिता ने उसे यह नौकरी नहीं करने को कहा था। उनके ही एक हॉस्टल मेट सिरोही पुलिस में तैनात दिनेश  चौधरी ने सबगुरु न्यूज को बताया कि हम सब पुलिस, प्रशासन और बैंक आदि की परीक्षाएं देने के इच्छुक थे, लेकिन रमेश ने कभी भी इन नौकरियों को प्राथमिकता नहीं दी।

    anjana kalbi hostal in sirohi and the room of martyr ramesh during his student life

    -आंजणा हॉस्टल का वो कमरा नम्बर 20
    सिरोही के सारणेश्वर रोड स्थित आंजणा कलबी समाज के न्यू बिल्डिंग का कमरा नम्बर 20 की दीवारें आज भी शहीद रमेशकुमार की यादें बयां कर रही हैं। इस रूम की दीवार और दरवाजे पर भारतीय सेना का प्रमोशनल पोस्टर भी लगा हुआ है। जो इस बात की गवाही देता है कि रमेश चौधरी में देश सेवा के लिए आर्मी का हिस्सा बनने का कितना जुनून था।

    दो साल तक इस कमरे में उनके रूममेट रहे रायपुर निवासी मुकेशकुमार ने बताया कि आर्मी को लेकर उनकी जुनूनियत का आलम यह था कि शुरू से ही अपने को फिट रखते थे। इसी कारण सिरोही राजकीय महाविद्यालय में एडमिशन लेते ही एनसीसी ज्वाइन की। जुनूनियत इस हद तक थी कि जिम का सामना नहीं होने पर लकड़ी पर पत्थर बांधकर वेट लिफ्टिंग और डंबल जैसे जिम इक्यूपमेंट बनाकर वर्जिश करता था।

    ज्योग्राफी के प्रेक्टिकल के लिए उनके साथ जाने वाले सहपाठी बडगांव निवासी देवाराम चौधरी ने बताया कि हम लोग दूसरे कम्पीटीशन की तैयारियां करते थे, लेकिन रमेश चौधरी में आर्मी का जुनून था। रोज अरविंद पेवेलियन में फिजिकल की तैयारी करना, मेडीकल के लिए खुदको स्वस्थ रखना नित्यक्रम में शामिल था। पहली बार मेडीकल में अनफिट होने के कारण सेलेक्ट नहीं हो पाए, दूसरी बार मेडीकल भी क्लीयर किया और बीएसएफ में भर्ती हुए।

    ncc office of sirohi government collage and ramesh choudhri during ncc camp

    -सी-सर्टिफिकेट के लिए की तैयारी
    गांव में स्कूल शिक्षा पूर्ण करने के बाद रमेशकुमार ने 2010 में सिरोही के राजकीय महाविद्यालय में एडमिशन लिया। यहां पर एनसीसी ज्वाइन की। राजकीय महाविद्यालय के एनसीसी प्रभारी भगवानाराम बिश्नोई ने सबगुरु न्यूज को बताया कि रमेश एक जुनूनी कैडेट था। एनसीसी कैम्प्स में आर्मी के प्रति उसका जुड़ाव और बढ़ा। सी-सर्टिफिकेट लेने के बाद वह बीएसएफ में शामिल हुआ। उसने सी-सर्टिफिकेट में भी ए-ग्रेड पाया था।

    (शहीद रमेश के गांव नागाणी और सिरोही से परीक्षित मिश्रा और गणपतसिंह मांडोली की रिपोर्ट)

    शहीद को दी नम आँखों से श्रदांजलि

    संत श्री किशना राम जी विश्रान्ति गृह जयपुर मे आंजना समाज के कश्मीर घाटी मे शहिद हुए लाल श्री रमेश चौधरी नागानी, रेवदर को 2 मिनिट का मौन रख कर श्रद्धाजंली दी गई । एडवोकेट जितेन्द्र चौधरी रेवदर ने शहीद चौधरी की जीवन पर प्रकाश डाला। वीर शहीद श्री रमेश चौधरी आंजणा समाज के लिए सम्मान का प्रतीक बन गए है हर समाज बंधु इन पर गर्व करता रहेगा। उका राम मालवी ने मौन द्वारा प्रेरणा की बात कही । इस अवसर पर भरत, गोपाराम, मुकेश, रमेश, मगन, हेमन्त, दिनेश,  राहुल, अनुप, करणाराम, लाखाराम, सुरेन्द्र, उत्तम, केराराम, धिरु भाई, विरमाराम,  शंकर आदी भाई उपस्तिथ थे !