नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी के संकेत मिलने लगे हैं। इस साल कच्चे तेल की कीमतों में अभी तक करीब 28 फीसदी की तेजी दर्ज की जा चुकी है। वहीं चीन, अमेरिका और ओपेक के आंकड़ों को देखते हुए विशेषज्ञ बड़ी तेजी की बात करने लगे हैं। ओपेक मांग बढ़ने की संभावना जता रहा है तो वहीं अमेरिका ने अगले दो वर्ष के लिए उत्पादन ग्रोथ अनुमान घटा दिया है। विषेशज्ञों की मानें तो कच्चे तेल की कीमतें चालू स्तर से 25 से 30 फीसदी तक चढ़ सकती हैं। अगले तीन महीनों में तेल की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना है। अगर क्रूड में तेजी इसी तरह जारी रही, तो आगे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और उबाल आ सकता है। बीते 15 दिनों में पेट्रोल 7.09 रुपए प्रति लीटर और डीजल 5.08 रुपए प्रति लीटर महंगा हो चुका है।
कच्चे तेल की कीमतों में आएगी जोरदार तेजी
पैराडाइम कमोडिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीरेन वकील ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में चालू स्तर से 25 फीसदी से ज्यादा की तेजी संभव है। वकील के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों पर चौतरफा पॉजिटिव सेंटिमेंट बन रहा है। अगले तीन-चार महीनों में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 70 डॉलर का स्तर दिखा सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी का असर घरेलू बाजार पर भी दिखेगा और एमसीएक्स क्रूड 4,800 रुपए प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना है।
ओपेक ने जताई डिमांड बढ़ने की संभावना
ओपेक ने कच्चे तेल पर एक रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि दुनिया भर में कच्चे तेल की मांग पिछले अनुमानित आंकड़ों से ज्यादा रहने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक 2015 में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की मांग रोजाना 11.80 लाख बैरल तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है, जबकि पिछला अनुमान 11.70 लाख बैरल का था।
अमेरिका में घटेगा क्रूड उत्पादन
अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने हाल में 2015-16 के लिए उत्पादन ग्रोथ अनुमान घटा दिया है। अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन ने 2015 के लिए अमेरिका में कच्चे तेल के उत्पादन अनुमान को 5.50 लाख बैरल से घटाकर 5.30 लाख बैरल रोजाना कर दिया है, जबकि 2016 में ग्रोथ 20,000 बैरल रोजाना हो सकती है। इसका पिछला अनुमान 80,000 बैरल रोजाना था। हालांकि 2015 के लिए डिमांड ग्रोथ के अनुमान को बढ़ा दिया है। क्रूड की मांग की ग्रोथ 2015 में 3.40 लाख बैरल रोजाना रह सकती है। वहीं लगातार दूसरे हफ्ते भी क्रूड का भंडार अमेरिका में घटी है।
कैपिटल सिंडीकेट के प्रबंध निदेशक सुब्रमण्यम पशुपति के मुताबिक अब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट खत्म हो चुकी है और तेजी के संकेत दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका, चीन और यूरोप से कच्चे तेल की मांग बढ़ने की संभावना है।
खराब आर्थिक आंकड़ों से दरें बढ़ने में होगी देरी
अमेरिका की रिटेल बिक्री हो या फिर लेबर मार्केट डेटा सभी कमजोर आए हैं। इस कारण फेड ब्याज दरें बढ़ाने में देरी कर सकता है। मंगलवार को फेड के अधिकारियों ने ब्याज दरों पर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया। वहीं फेड के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी कब होगी, इसका हमें नहीं पता। हालांकि बाजार में आम सहमति है कि फिलहाल अमेरिका में ब्याज दरें नहीं बढ़ेंगी। अप्रैल में अमेरिका की रिटेल बिक्री घटकर शून्य रह गई है। मार्च में यह आंकड़ा 1.1 फीसदी था। कमजोर आर्थिक आंकड़ों के चलते डॉलर इंडेक्स 94 के नीचे आ गया है।
दरें बढ़ने में देरी से डॉलर कमजोर
ब्याज दरें बढ़ने में देरी के चलते डॉलर इंडेक्स में तेजी गिरावट आई है। डॉलर प्रमुख करेंसी के मुकाबले पिछले दो महीने में करीब 7 फीसदी कमजोर हुआ है। 13 मार्च 2015 को डॉलर इंडेक्स 100.785 के स्तर पर पहुंच गया था। फिलहाल डॉलर इंडेक्स 94.05 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वकील के मुताबिक आने वाले दिनों में डॉलर 90 के नीचे फिसल सकता है।
चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत
बीते 6 महीने में चीन के सेंट्रल बैंक ने तीन बार ब्याज दरें घटाई हैं, जिसके बाद अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। 14 अप्रैल को आए हाउसिंग सेक्टर के बेहतर आंकड़े इस बात के सबूत हैं। वहीं अमेरिका को पीछे छोड़ चीन क्रूड का सबसे बड़ा आयातक देश बन गया है। अप्रैल के दौरान चीन ने 74 लाख बैरल रोजाना कच्चा तेल का आयात किया, जबकि इस दौरान अमेरिका ने रोजाना दूसरे देशों से 72 लाख बैरल क्रूड खरीदा।
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