इस सप्ताह ‘काउंसलिंग कॉर्नर’ में पढ़िए कॉमर्स स्ट्रीम और उस पर आधारित कॅरियर के विकल्पों के बारे में। लोकप्रियता के मामले में यह छात्रों और अभिभावकों के बीच साइंस स्ट्रीम के बाद दूसरे स्थान पर है। अंडर ग्रेजुएट स्तर पर कॉमर्स एक प्रमुख विषय है। इसका संबंध मूल रूप से व्यापार की समझ, बाजार के उतार-चढ़ाव, अर्थव्यवस्था की जानकारी, मौद्रिक और औद्योगिक नीतियों आदि से है। विषय के स्तर पर कॉमर्स अकाउंटेंसी, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, फाइनेंस, इकोनॉमिक्स, मार्केटिंग और ई-कॉमर्स सहित कई अन्य विषयों का मिलाजुला विस्तृत क्षेत्र है। इसलिए इसमें पढ़ाईऔर रोजगार के लिए पर्याप्त विकल्प उपलब्ध हैं। हर विषय की तरह कॉमर्स और उससे संबंधित विषयों की पढ़ाई के लिए भी कुछ अभिरुचियों का होना जरूरी होता है। यहां कुछ प्रश्न दिए गए हैं, जिनका उत्तर देकर आप यह जान सकते हैं कि आपकी अभिरुचि कॉमर्स के लिए उपयुक्त है या नहीं।
इन प्रश्नों से जांचें अभिरुचि
- क्या आपके पास गणना की अच्छी क्षमता है?
- क्या आपमें विश्लेषणात्मक कौशल है?
- क्या आपके पास व्यापार का व्यावहारिक बोध है?
- क्या आप त्रुटिरहित और सटीक काम को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं?
- क्या आप कार्यालय के माहौल का आनंद उठाते हैं?
- क्या आपमें गणनाएं करने के साथ आंकड़ों को समझाने का हुनर है?
- क्या आप बजट, व्यापार की खबरों और आर्थिक समीक्षाओं को पढ़ते हैं?
- क्या आप में प्रशासकीय और संगठन के रूप में काम करने की कुशलता है?
पूछे गए इन प्रश्नों में से अगर अधिकांश का जवाब आपके पास ‘हां’ है, तो समझिए आपके भीतर वह अभिरुचि है, जो कॉमर्स के क्षेत्र में कॅरियर बनाने के लिए जरूरी है।
- क्या आपके पास गणना की अच्छी क्षमता है?
- क्या आपमें विश्लेषणात्मक कौशल है?
- क्या आपके पास व्यापार का व्यावहारिक बोध है?
- क्या आप त्रुटिरहित और सटीक काम को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं?
- क्या आप कार्यालय के माहौल का आनंद उठाते हैं?
- क्या आपमें गणनाएं करने के साथ आंकड़ों को समझाने का हुनर है?
- क्या आप बजट, व्यापार की खबरों और आर्थिक समीक्षाओं को पढ़ते हैं?
- क्या आप में प्रशासकीय और संगठन के रूप में काम करने की कुशलता है?
पूछे गए इन प्रश्नों में से अगर अधिकांश का जवाब आपके पास ‘हां’ है, तो समझिए आपके भीतर वह अभिरुचि है, जो कॉमर्स के क्षेत्र में कॅरियर बनाने के लिए जरूरी है।
कॉमर्स में उपलब्ध विषयों के विकल्प
बिजनेस इकोनॉमिक्स
इस विषय में लॉ ऑफ डिमांड एंड सप्लाई, लॉ ऑफ रिटर्न्सर, इलास्टिसिटी, थ्योरी ऑफ प्राइसिंग अंडर डिफरेंट मार्केट फॉर्म्स आदि से संबंधित कॉन्सेप्ट के बारे में पढ़ाया जाता है।
बिजनेस इकोनॉमिक्स
इस विषय में लॉ ऑफ डिमांड एंड सप्लाई, लॉ ऑफ रिटर्न्सर, इलास्टिसिटी, थ्योरी ऑफ प्राइसिंग अंडर डिफरेंट मार्केट फॉर्म्स आदि से संबंधित कॉन्सेप्ट के बारे में पढ़ाया जाता है।
कॉस्ट अकाउंटिंग
इस विषय में जॉब एंड कॉन्ट्रैक्ट कॉस्टिंग, ओवरहेड्स कॉस्टिंग, स्टैंडर्ड एंड वेरिएंस कॉस्टिंग और बजटरी कंट्रोल से जुड़ी प्रक्रियाओं के बारे में प्रशिक्षित किया जाता है।
इस विषय में जॉब एंड कॉन्ट्रैक्ट कॉस्टिंग, ओवरहेड्स कॉस्टिंग, स्टैंडर्ड एंड वेरिएंस कॉस्टिंग और बजटरी कंट्रोल से जुड़ी प्रक्रियाओं के बारे में प्रशिक्षित किया जाता है।
ऑडिटिंग
इस विषय में वैल्यूएशन, वाउचिंग ऑफ ट्रांजेक्शन, एसेट्स एंड लाइबिलिटी आदि से जुड़े मामलों के बारे में बताया जाता है। इसमें क्लब, हॉस्पिटल और चैरिटेबल संस्थानों जैसे संगठनों की ऑडिटिंग के बारे में भी सिखाया जाता है।
इस विषय में वैल्यूएशन, वाउचिंग ऑफ ट्रांजेक्शन, एसेट्स एंड लाइबिलिटी आदि से जुड़े मामलों के बारे में बताया जाता है। इसमें क्लब, हॉस्पिटल और चैरिटेबल संस्थानों जैसे संगठनों की ऑडिटिंग के बारे में भी सिखाया जाता है।
फाइनेंशियल अकाउंटिंग
यह विषय मुख्य रूप से प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट, बैलेंस शीट, कंपनी अकाउंट, कैलकुलेशन ऑफ डेप्रिशिएशन एंड वैल्यूएशन ऑफ शेयर, गुडविल ऑफ कंपनी और नॉलेज ऑफ अकाउंटिंग स्टैंडर्ड (इंडिया/ इंटरनेशनल) आदि के बारे में जानकारी देता है।
यह विषय मुख्य रूप से प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट, बैलेंस शीट, कंपनी अकाउंट, कैलकुलेशन ऑफ डेप्रिशिएशन एंड वैल्यूएशन ऑफ शेयर, गुडविल ऑफ कंपनी और नॉलेज ऑफ अकाउंटिंग स्टैंडर्ड (इंडिया/ इंटरनेशनल) आदि के बारे में जानकारी देता है।
बिजनेस फाइनेंस
इस विषय में फाइनेंशियल एनालिसिस और मैनेजमेंट ऑफ कैपिटल आदि व्यापारिक दुनिया की बुनियादी बातें समझायी जाती हैं। इसके अलावा लाभ के लिए पूंजी के बेहतर उपयोग की विधियों को समझने में भी यह विषय मदद करता है।
इस विषय में फाइनेंशियल एनालिसिस और मैनेजमेंट ऑफ कैपिटल आदि व्यापारिक दुनिया की बुनियादी बातें समझायी जाती हैं। इसके अलावा लाभ के लिए पूंजी के बेहतर उपयोग की विधियों को समझने में भी यह विषय मदद करता है।
इनकम टैक्स
इस विषय के तहत इनकम टैक्स, टैक्स प्लानिंग, टैक्स डिडक्शन और नॉट टैक्सेबल इनकम आदि के बारे में नियमों व कर संबंधी कानूनों की जानकारी दी जाती है।
इस विषय के तहत इनकम टैक्स, टैक्स प्लानिंग, टैक्स डिडक्शन और नॉट टैक्सेबल इनकम आदि के बारे में नियमों व कर संबंधी कानूनों की जानकारी दी जाती है।
बिजनेस लॉ
व्यापार से संबंधित देश के अमूमन सभी कानून इस विषय के अध्ययन क्षेत्र में आते हैं। कंपनीज एक्ट और कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट आदि कानूनों को प्रमुख रूप से इस विषय में पढ़ाया जाता है।
व्यापार से संबंधित देश के अमूमन सभी कानून इस विषय के अध्ययन क्षेत्र में आते हैं। कंपनीज एक्ट और कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट आदि कानूनों को प्रमुख रूप से इस विषय में पढ़ाया जाता है।
मार्केटिंग
यह विषय प्रोडक्ट, प्राइसिंग मेथड, प्रोमोशन, डिस्ट्रिब्यूशन चैनल और लॉजिस्टिक्स आदि के बारे में बताता है।
यह विषय प्रोडक्ट, प्राइसिंग मेथड, प्रोमोशन, डिस्ट्रिब्यूशन चैनल और लॉजिस्टिक्स आदि के बारे में बताता है।
बिजनेस कम्यूनिकेशन
यह विषय मुख्य रूप से व्यापार संबंधी संवाद कौशल को निखारने पर केंद्रित है। इस विषय के जरिए छात्रों को व्यापारिक कार्यो के लिए उपयोग में आने वाले बिजनेस लेटर, नोटिस और मेमो आदि को तैयार करने की कला सिखाई जाती है। मौखिक संवाद के बारे में भी यह विषय प्रशिक्षित करता है।
यह विषय मुख्य रूप से व्यापार संबंधी संवाद कौशल को निखारने पर केंद्रित है। इस विषय के जरिए छात्रों को व्यापारिक कार्यो के लिए उपयोग में आने वाले बिजनेस लेटर, नोटिस और मेमो आदि को तैयार करने की कला सिखाई जाती है। मौखिक संवाद के बारे में भी यह विषय प्रशिक्षित करता है।
रोजगार के लिए जरूरी कौशल
- आंकड़ों की गणना और उनके विश्लेषण में रुचि हो।
- संवाद का बेहतर कौशल हो।
- टीम के साथ काम करने और उसका नेतृत्व करने की क्षमता हो।
- संगठन संबंधी और प्रशासनिक क्षमताएं हों।
- तार्किक दृष्टि से चीजों को परखने का हुनर हो।
- सटीक और त्रुटिरहित काम करने में निपुणता हो।
- लंबी अवधि तक लगातार काम करने की क्षमता हो।
- अपने कार्य क्षेत्र से जुड़ी नई चीजों और नवीनतम तकनीकों को सीखने की जिज्ञासा हो।
- रचनात्मकता के साथ उच्च स्तर की बौद्धिक क्षमता हो।
- आंकड़ों की गणना और उनके विश्लेषण में रुचि हो।
- संवाद का बेहतर कौशल हो।
- टीम के साथ काम करने और उसका नेतृत्व करने की क्षमता हो।
- संगठन संबंधी और प्रशासनिक क्षमताएं हों।
- तार्किक दृष्टि से चीजों को परखने का हुनर हो।
- सटीक और त्रुटिरहित काम करने में निपुणता हो।
- लंबी अवधि तक लगातार काम करने की क्षमता हो।
- अपने कार्य क्षेत्र से जुड़ी नई चीजों और नवीनतम तकनीकों को सीखने की जिज्ञासा हो।
- रचनात्मकता के साथ उच्च स्तर की बौद्धिक क्षमता हो।
कॉमर्स में पढ़ाई के विकल्प
10+2
- फाउंडेशन (सीए, आईसीडब्ल्यूए, सीएस)
- लॉ (पांच वर्षीय)
- कंप्यूटर इनरिचमेंट कोर्स (अल्प अवधि का)
- फाउंडेशन (सीए, आईसीडब्ल्यूए, सीएस)
- लॉ (पांच वर्षीय)
- कंप्यूटर इनरिचमेंट कोर्स (अल्प अवधि का)
बैचलर डिग्री
- बी.कॉम
- बी.कॉम
स्पेशलाइजेशन
- कॉस्ट अकाउंट
- सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस
- मार्केटिंग
- बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन
- कॉस्ट अकाउंट
- सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस
- मार्केटिंग
- बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन
पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री
- एम.कॉम.
- इंटरनल/एक्सटर्नल
- एमबीए
- एम.कॉम.
- इंटरनल/एक्सटर्नल
- एमबीए
स्पेशलाइजेशन
फाइनेंस, मार्केटिंग, सिस्टम्स, इंटरनेशनल ट्रेड
- सीए, आईसीडब्ल्यूए, सीएस, सीएफए
फाइनेंस, मार्केटिंग, सिस्टम्स, इंटरनेशनल ट्रेड
- सीए, आईसीडब्ल्यूए, सीएस, सीएफए
डिप्लोमा
- बैंकिंग
- टैक्सेशन
- बैंकिंग
- टैक्सेशन
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