किसानों की यह तकनीक अजूबे से कम नहीं, बूंद-बूंद पानी से उगा दिए तरबूज


रांची। आमतौर पर तरबूज-खरबूज नदी-नहरों के किनारे रेतीले इलाकों में उगाए जाते हैं। लेकिन, रांची से 35 किमी दूर ओरमांझी में कई किसानों ने इस फल को 280 एकड़ पठारी जमीन पर उगाकर दिखा दिया। यहां सात-आठ प्रकार के तरबूज-खरबूज पैदा किए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने इसके लिए एक तकनीक का प्रयोग किया, जो सफल रहा।
आज इस तकनीक के माध्यम से कई किसान अच्छी कमाई कर रहे हैं। ओरमांझी से 70-80 टन तरबूज और 20-25 टन खरबूज हर दिन रांची की थोक मंडी में पहुंचता है। इस तरह की खेती की शुरुआत अनगड़ा के किसान दुबराज महतो ने की। फिर आदिवासी किसान गोवर्धन मुंडा ने रिकॉर्ड उत्पादन कर किसानों के लिए मिसाल कायम की। किसान इस तकनीक को किसी अजूबे से कम नहीं मानते।

ड्रिप सिस्टम और मलचिंग से खेती

तरबूज-खरबूज के लिए पानी ज्यादा चाहिए। इसलिए किसानों ने खेतों में ड्रिप सिस्टम लगवाया है। इससे फसल पर जरूरत के मुताबिक बूंद-बूंद पानी गिरता है। नमी बनी रहे इसलिए पॉलीथीन की शीट्स मलचिंग लगाकर ढक दी जाती है।

क्या है खास इन तरबूज और खरबूज में
>16 से ज्यादा किस्मों की पैदावार।
>रांची के 10 बड़े इलाकों में हो रही है तरबूज-खरबूज की खेती।
>पठारी क्षेत्र में उगे तरबूज पांच फीसदी ज्यादा मीठे होते हैं अन्य राज्यों की अपेक्षा।

इस साल मार्च-अप्रैल में थोड़ा तरबूज ओड़िशा से आया था। लेकिन यहां फसल आते ही आवक रुक गई। राज्य में इतनी फसल होने लगी है कि अगले साल से अन्य राज्यों से तरबूज-खरबूज मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ज्यादा उत्पादन हुआ तो दूसरी जगह भेजा जाएगा।
साजिद सुहैल, थोक विक्रेता, रांची

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