क्यों है फलों की खेती का सुनहरा भविष्य, पेप्सी और कोका-कोला की मांग बहुत ज्यादा गिरी

देश के किसी भी शहर या गांव की दुकान पर आपको पेप्सी और कोका कोला की बोतलें रखी मिल जाती है। लेकिन शायद आपने गौर नहीं किया कि अब इनकी जगह तेजी से जूस की बोतले ले रही है। नए आंकड़े इस तस्वीर को सच भी साबित करते हैं। लेकिन ये खबर किसान मित्रों के लिए अच्छी कैसे हैं।
आंकड़े जानने से पहले आप ये जान लें, कि देश और दुनिया में अगर फलों के जूस का बाजार बढ़ता है तो कंपनियों को फलों की बेतहाशा जरूरत पड़ेगी और जिनकी पूर्ति सिर्फ किसानों के खेतों से ही हो सकती है। इसलिए पेप्सी और कोला कोला के ड्रिंक्स की गिरती मांग और फ्रूट जूस के बढ़ती मांग से किसानों को ही आखिरकार फायदा होना है। इसलिए अगर आप फलों की खेती करते हैं तो इसे करते रहिए और अगर आप फलों की खेती का मन बना रहा है और फिर मन पक्का कर ही लीजिए।

अब देखिए कि ताजा आंकड़े क्या कह रहे हैं।

नीलसन के डेटा के मुताबिक, इस साल के पहले 6 महीनों में रियल, स्लाइस और ट्रॉपिकाना जैसे जूस ब्रांड्स सबसे ज्यादा बिकने वाले 5 बेवरेजेज में पेप्सी और कोक के फिजी ड्रिंक्स से आगे निकल गए। हालांकि, ये आंकड़े सिर्फ मॉडर्न ट्रेड के हैं। इससे उस ग्लोबल ट्रेंड की पुष्टि होती है कि कन्जयूमर्स धीरे-धीरे कोक-पेप्सी के कोल्डड्रिंक्स के मुकाबले स्वास्थ्य के लिए अच्छे बेवरेजेज को पसंद कर रहे हैं। अब इनकी ग्रोथ घटकर सिंगल डिजिट यानी 4-6 पर्सेंट रह गई है।
नीलसन के डेटा के मुताबिक, डाबर का रियल (Real), पेप्सिको का स्लाइस मैंगो ड्रिंक (Slice mango drink) और ट्रॉपिकाना जूस मॉडर्न ट्रेड में ज्यादा बिकने वाले टॉप 5 बेवरेजेज में शामिल है। ये प्रॉडक्ट्स कोक और पेप्सी से भी आगे निकल चुके हैं। मॉन्डेलेज का टैंग पाउडर ड्रिंक और हमदर्द का ड्रिंक रूहअफजा भी टॉप बेवरेजेज में शामिल हैं। चार साल (जनवरी-जून 2013 से जनवरी-जून 2016 ) के आंकड़े दिखाते हैं कि 2013 और 2014 में पेप्सी मॉडर्न ट्रेड में सबसे ज्यादा बिकने वाला ब्रांड था, वहीं पिछले साल कोक टॉप 5 ब्रांड्स में शामिल था। इस साल रियल के 8 पर्सेंट हिस्से की तुलना में कोक का मार्केट शेयर 4 पर्सेंट रहा।
नीलसन के अधिकारियों ने साफ किया कि यह डेटा सिर्फ मॉडर्न ट्रेड का है। जनरल ट्रेड में बड़े पैमाने पर फिजी (कोल्ड) ड्रिंक्स की बिक्री में बढ़त हो सकती है। फ्यूचर ग्रुप के प्रेजिडेंट और FMCG देवेंद्र चावला ने बताया, ‘पारंपरिक ड्रिंक्स और स्वाद का जमाना लौट आया है। पिछले कुछ दशकों में बेवरेजेज के ग्लोबल ब्रांड्स ने मार्केटिंग पर जमकर पैसा बहाया, लेकिन कन्जयूमर्स अब फिर से वही पसंद कर रहे हैं, जिसे वे सेहतमंद और पारंपरिक स्वाद वाला मानते हैं।
"ऑनलाइन सुपरमार्केट इकाई Bigbasket.com के को-फाउंडर विपुल पारेख ने भी इस ट्रेंड की पुष्टि की. उन्होंने बताया, 'जूस की ग्रोथ कोल्ड ड्रिंक्स के मुकाबले है 2.5 गुना ज्यादा. हम पिछले 6 महीनों से इस ट्रेंड को देख रहे हैं. ग्राहकों का झुकाव अब सेहतमंद फूड और बेवरेजेज की तरफ बढ़ है रहा"
 डाबर के जूस ब्रांड, रियल की सेल्स 1,000 करोड़ को पार कर गई है। कंपनी ने 1998 में इस ब्रांड को लॉन्च किया था। कंपनी के सीईओ सुनील दुग्गल ने इसकी सफलता का कारण कुछ इस तरह बताया, ‘इसके फ्लेवर के 30 वैरिएंट्स हैं। हम ऐसा टेस्ट तैयार करने की कोशिश की है, जो भारतीयों की पसंद के मुताबिक हो।

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