शिकारपुरा के गादीपति दयाराम महाराज समेत बड़ी संख्या में साधु संत रहे उपस्थित
निकटवर्ती लुम्बा की ढाणी स्थित राजाराम
आश्रम के महंत रघुनाथराम महाराज को सोमवार को बैकुंठी निकाल समाधि दी गई।
जिसमें हजारों की संख्या में भक्त एवं साधु-संत उपस्थित रहे। गौरतलब है कि
महंत रविवार देर शाम को गायों की सेवा करते समय देवलोक हो गए थे, उनकी
पार्थिक देह को दर्शनार्थ आश्रम परिसर में रखा गया था। महंत के देवलोक होने
की सूचना क्षेत्र में फैलते ही हजारों की संख्या में भक्तगण एवं साधु
संतों के लुम्बा की ढाणी पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। सोमवार को सवेरे
दस बजे तक हजारों की संख्या में भक्तगण पहुंच गए थे। भक्तों ने महाराज के
अंतिम दर्शन किए। इसके कुछ समय पश्चात गाजेबाजे के साथ उनकी बैकुंठी निकाली
गई। इसके बाद आश्रम परिसर में वैदिक मंत्रोंच्चार के साथ 11 बजे शुभ
मुहूर्त में रघुनाथराम महाराज के पार्थिक देह को समाधि दी गई। इस अवसर पर
राजाराम आश्रम शिकारपुरा के गादीपति दयाराम महाराज, लहर भारती कुटिया के
महंत राज भारती महाराज, मीठा महंत उम्मेदगिरी महाराज, कांकाणी महंत
उकारगिरी, वालेरा महंत पारसभारती महाराज, चेंडा से पदमाराम महाराज, संत
दरगाराम केशवना के अलावा भीनमाल विधायक पूराराम चौधरी, प्रदेश कांग्रेस
सचिव जगदीश चौधरी, पूर्व प्रधान रामप्रकाश चौधरी, एडवोकेट बाबूलाल सोलंकी,
भाजपा मंडल अध्यक्ष तख्तसिंह तालियाणा, सायला सरपंच सुरेश राजपुरोहित,
नरसाणा सरपंच नैनाराम चौधरी, भाजयुमो जिलाध्यक्ष हीराराम जाखड़, भाजपा
जालोर ग्रामीण मंडल के महामंत्री केशरसिंह राजपुरोहित, जिला परिषद सदस्य
मंगलसिंह सिराणा, सवाराम चौधरी सहित बड़ी संख्या में राजनेता एवं भक्त
मौजूद थे। अंतिम दर्शन को आतुर रहे भक्त
संतरघुनाथराम महाराज के अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में भक्त आए। भक्तों की भीड़ इतनी थी कि आश्रम परिसर में पैर रखने तक की जगह नहीं थे। दर्शन को आतुर भक्तों ने मकानों की छत एवं नीम के वृक्षों पर चढ़ दर्शन किए।
महंतका शंभूरोट कल
राजारामआश्रम के महंत रघुनाथराम महाराज के देवलोक होने के बाद आश्रम परिसर में शिकारपुरा गादीपति दयाराम महाराज के सान्निध्य में चौधरी समाज के लोगों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में महंत रघुनाथराम का शंभूरोट बुधवार को आयोजित किया जाएगा। जिसमें महंत की समाधि पर भोग लगाया जाएगा तथा श्रद्धासुमन अर्पित किए जाएंगे।
पाली के थे संत, बचपन का नाम प्रकाश था
महंत रघुनाथराम महाराज का जन्म पाली जिले के धोलेरिया जागीर गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम हरिराम माता का नाम धरमोबाई था। वे पांच भाई-बहन थे। संत के बचपन का नाम प्रकाश था। जानकारी के अनुसार हरिराम की पत्नी की प्रसव पीड़ा के दौरान ज्यादा तबीयत बिगड़ गई थी। उस समय हरिराम ने मन्नत मांगी थी कि बच्चे एवं माता के सकुशल रहने पर वह एक बच्चे को शिकारपुरा आश्रम को भेंट कर देगा। जिसपर जन्म के बाद प्रकाश को उन्होंने संत को सौंप दिया। प्रकाश पांच साल का था तब शिकारपुरा से आए संत देवाराम महाराज उन्हें ले गए थे। आश्रम में राजाराम महाराज के शिष्य देवाराम महाराज ने ही प्रकाश का नामकरण कर नया नाम रघुनाथराम रखा था। राजाराम महाराज के भाई का नाम रघुनाथराम था, जिन्होंने कम उम्र में समाधि ले ली थी। इस वजह से प्रकाश का नाम रघुनाथराम रखा गया ताकि वे राजाराम महाराज के भाई रघुनाथराम के सपनों एवं कार्यों को पूर्ण कर सके। संभुआ पट्टी के चौधरी समाज की विनती पर शिकारपुरा के गादीपति ने रघुनाथराम महाराज करीब सात साल पहले लुम्बा की ढाणी आश्रम भेजा था तब वे ये ही पर सेवा के कार्य में लगे थे।




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