ऐसे हुई शुरुआत
जिले में टमाटर की खेती की शुरुआत साल 1998 से हुई थी। उस समय अमरोहा
निवासी अब्दुल रऊफ ने सबसे पहले टमाटर की खेती की थी। जिसके बाद टमाटर बीज व
कीटनाशक बनाने वाली कंपनियों ने इस गांव की ओर रुख किया था। कंपनी के
अधिकारियों ने किसानों की ललक देखी, तो उन्हें टमाटर की खेती के लिए
प्रोत्साहित करने लगे। इसके बाद कंपनियों ने कुछ किसानों को राजस्थान और
बेंगलुरू में ट्रेनिंग के लिए भेजा। बस उसके बाद से किसान टमाटर की खेती के
बदौलत नाम और पैसा दोनों कमा रहे हैं।
पूरे सूबे में अव्वल है गांव, बीज से भी कमाते हैं किसान
अमरोहा जिले में तकरीबन 1200 हेक्टेयर में टमाटर की खेती होती है।
सलारपुर खालसा और इसके आसपास बसे तीन अन्य गांव जमापुर, सूदनपुर,
अंबेडकरनगर में ही अकेले 1000 हेक्टेयर की खेती होती है। यह गांव मुरादाबाद
मंडल में भी अव्वल नंबर पर है। जबकि सूबे में भी टमाटर खेती में आगे रहने
वाली जगहों में इस गांव का नाम शामिल है। यहां के किसान केवल टमाटर ही
नहीं, बीज बेचकर भी कमाते हैं। पिछले साल के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर
प्रदेश में डेढ़ क्विंटल टमाटर बीज की बिक्री हुई थी। जिसमें अकेले सलारपुर
खालसा में से ही 80 किलो बीज बिका था।
पूरे देश में होती है टमाटर की सप्लाई
देश के अधिकांश क्षेत्रों तक सलारपुर खालसा की जमीन पर पैदा हुआ टमाटर
पहुंचता है। गांव में 17 साल से टमाटर की खेती चल रही है, जिसका क्षेत्रफल
लगातार फैलता ही जा रहा है। अब मुरादाबाद मंडल में सबसे ज्यादा टमाटर की
खेती इसी गांव में होती है। कारोबार के लिहाज से यह तेजी से तरक्की कर रहा
है। टमाटर की खेती के पांच माह के सीजन में यहां के किसान 60 करोड़ रुपए का
कारोबार करते हैं।
30 गांवों के लोग करते हैं मदद
यहां टमाटर के कारोबार से रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है। जब फसल पक कर
तैयार हो जाती है और इसकी बिक्री शुरू होती है, तो जिले के 30 गांवों के
लोग यहां काम करने दौड़ पड़ते हैं। दिहाड़ी पर काम करने वाला किसान, एक दिन
में 3-4 सौ रुपए की मजदूरी कर लेते हैं। बड़े ही नहीं, गांव के बच्चे और
बुजुर्ग भी इसी काम में जुट जाते हैं।
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