सफेद प्याज की नई किस्म अकोला में किसानों को करा रही है लाखों की कमाई, प्रति एकड़ रू 2.50 लाख तक का लाभ


महाराष्ट्र के बाहर के ­बहुत ही लोगों को ये पता हो कि महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में लाल नहीं बल्कि सफदे प्याज को ज्यादा पसंद किया जाता है। ICAR के प्याज और लहसुन अनुसंधान निदेशालय (ICAR-Directorate of the Onion and Garlic Research) 2013 में सफेद प्याज की एक ऐसी किस्म विकसित की, जो अब विदर्भ के सैकड़ों किसानों के लिए जबरदस्त कमाई का जरिया बन गया है। सफेद प्याज की इन नई किस्म का नाम है भीमा शुभ्रा।
अप्रैल 2013 में एक कार्यशाला के दौरान सफेद प्याज की भीमा शुभ्रा किस्म को कुछ किसानों को दिया गया। भीमा शुभ्रा प्याज की रोपाई खरीफ के दौरान 110 से 115 दिनों में होती है जबकि पछेती खरीफ (खरीफ की फसल के दौर का आखिरी कुछ दिन) में 120-130 दिनों में ये फसल परिपक्व होती है।
महाराष्ट्र के अकोला जिले के एक किसान हैं नामदेवराव अढाऊ। इन्होंने अनुसंधान से इस किस्म का 5 किलो बीज खरीदा और अनुसंधान की गाइलाइंस के मुताबिक उसने 1.25 एकड़ में उठी क्यारियों पर प्याज की फसल को उगाया। उन्होंने समान आकार के साथ जोड़ एवं तोर कन्दों से रहित अच्छी गुणवत्ता के विपणन योग्य कन्द की चौंका देने वाली 21 टन प्रति एकड़ की उपज हासिल की, जिसे बेचकर उन्हें 2.50 लाख रूपए का लाभ हुआ।
सफेद प्याज की भीमा किस्म से मिली इस हैरतअंगेज सफलता के बाद किसान नाममदेव ने आप पास के बाकी किसानों को भी इससे जोड़ा। नतीजा अब 12 गांवों के करीब 300 किसानों का एक ग्रुप 750 एकड़ पर भीमा सफेद प्याज का उत्पादन कर रहा है। इससे ज्यादातर किसान 1 लाख रुपए प्रति एकड़ का लाभ कमा रहे हैं। किसान नामदेव की किसानों को जोड़ने और खेती में जबरदस्त कमाई के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी नागपुर में एक प्रोग्राम में तारीफ कर चुके हैं। 

लागत और कमाई

किसान नामदेव के मुताबिक प्रति एकड़ लागत करीब 40 हजार से 45 हजार रूपए आती है, जिसमें नर्सरी बनाना, बीज खरीदना, गोबर, रासायनिक और पानी इत्यादि की कीमत शामिल होती है। बीज करीब 2200 प्रति किलो आता है। नामदेव के मुताबिक वैसे तो एक एकड़ में 3 किलो बीज लगता है लेकिन अगर सही ढंग से नर्सरी तैयार की जाए तो सिर्फ 2 किलो बीज की ही एक एकड़ के लिए जरूरत पड़ेगी।
 रामदेव के मुताबिक पहले 2 साल इसमें बंपर पैदावार है होती. रामदेव को पहले 2 साल 200 से 210 कुंटल प्रति एकड़ पैदावार हुई. उसके बाद औसतन है 150 कुंटल की पैदावार होती. पिछले साल ये 3000 रूपए प्रति कुंटल तक बिका था.
भीमा सुपर रेड के मुकाबले भीमा शुभ्रा 2-3 रूपए प्रति किलो ज्यादा रेट में बिकता है। मौजूदा भाव 2400-2500 रूपए प्रति कुंटल है। विदेशों में इसका पाउडर बनाकर बेचा जाता है।
नामदेव के पास कुल 22 एकड़ जमीन है, लेकिन इस फसल को पानी की जरूरत होती है इस वजह से वो सिर्फ 4 एकड़ पर ही ये फसल करते हैं।

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