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बारिश के दौर में खरीफ की फसल के लिए बिजाई का कार्यक्रम लगभग पूर्ण होने की ओर है। अब फसलों की देखभाल और रोगों से बचाव पर किसानों को ध्यान देने की जरूरत है। खासतौर से बाजरे की फसल की। बाजरा ही प्रदेश में मुख्य खाद्यान फसल के रूप में माना जाता है। कम बारिश में भी किसानों के घर खाने लायक उपज हो जाती है और राज्य के मौसम से वाकिफ लोग इसी से संतोष कर लेते हैं। इसी कारण पूरी फसल को लेना जरूरी हो जाता है।
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| बाजरें में यह लगते हैं रोग हरित बाली रोग : बाजरे में मुख्य रूप से हरित बाली रोग लगता है। इसे तुलासिता और अंग्रेजी में डाउनीमिलड्यू रोग भी कहा जाता है। बिजाई के 25 से 35 दिन बाद में और कुछ स्थानों पर एक से डेढ़ माह बाद रोग के लक्षण दिखते हैं। इस रोग की पहचान करने के लिए बाजरे की पत्तियों को उलट कर देखना चाहिए। इन पत्तियों के निचली सतह पर सफेद पाउडर दिखाई देने लगता है। इन पत्तियों पर कई बार उलझे हुए बालों जैसी संरचना दिखती है। ऊपर से सफेद लाइनें भी दिखेंगी। इसकी रोकथाम के लिए बीजोपचार कर लेना चाहिए। ज्यादाबारिश से ब्लास्ट रोग : ज्यादा बारिश होने की दशा में बाजरे में ब्लास्ट रोग होने की आशंका रहती है। इस रोग पहचान बाजरे के पौधे की पत्तियों पर नाव के आकार के धब्बे से होती है। रोग की उग्रता होने पर ये चिह्न पौधे के तने पर भी देखे जा सकते हैं। इस रोग पर अभी दुर्गापुरा स्थित अनुसंधान संस्थान में शोध चल रहा है और दो साल में दवा के उपयोग के अच्छे परिणाम देखने में रहे हैं।
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बाजरा : बिजाई के बाद रोग से बचाव के उपाय भी जरूर करें
Shankar L. Anjana Luniyasar
किसी डिग्री का ना होना दरअसल फायेदेमंद है, अगर आप इंजिनियर या डाक्टर हैं तब आप एक ही काम कर सकते हैं | पर यदि आपके पास कोई डिग्री नहीं है, तो आप कुछ भी कर सकते हैं |
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