क्या वाकई नीम के दातुन की कीमत 65 रूपये


अगर आप किसी गांव या किसी कस्बे या फिर किसी छोटे शहर में रहते हैं, तो निश्चित तौर पर आपके घर में ही या फिर घर के बहुत ही नजदीक कोई ना कोई नीम का पेड़ तो जरूर लगा होगा। और अगर आप किसी लखनऊ, सूरत जैसे किसी शहर में रहते हैं तो आप अपनी कार जिस पेड़ के छाव में पार्क करते हैं, वो नीम का पेड़ हो सकता है। कहने का मतलब है कि जिस नीम के पेड़ को आप घर की मुर्गी दाल बराबर समझते हैं वो अब यूरोप और अमेरिका में लाखों की कीमत वाला पेड़ बन चुका है।
भारत तो अमेरिकियों के कॉलगेट से दांत साफ करने की आदत डाल चुका है लेकिन अब खुद अमेरिकी लोग भारतीय दातून यानी नीम के पेड़ की छोटी छोटी डंडियों (AUDREY CHEW STICKS NEEM TOOTHBRUSH NATURAL HEALTHY) से अपने दांत साफ कर रहे हैं। हैरत में पड़ने की जरूरत नहीं। ये 100 प्रतिशत सच हैं। अमेरिका के मॉल्स में ये दातून कोई 1-2 रूपए में नहीं बल्कि सौकड़ों रूपए में बिक रहे है।
विदेशों में अब इसका कारोबार कई हजार करोड़ रूपए का हो चुका है। दिल्ली में बैठे कुछ एजेंट्स के जरिए इनको अमेरिका और यूरोप के बड़े देशों जैसे जर्मनी, रूस में खूब एक्सपोर्ट किया जा रहा है। जैसे जैसे इनकी विदेशों में डिमांड बढ़ रही है वैसे वैसे कई विदेशियों ने खुद अपने ही घरों में नीम के पेड़ को लगाना भी शुरु कर दिया है।
कुछ भारतीयों ने तो अब इसे Ebay जैसी बहु राष्ट्रीय वेबसाइट्स के जरिए भारत में रहते हुए ही विदेशों में बेचना भी शुरु कर दिया है। ऐसी वेबसाइट्स पर इनकी कीमत करीब 10 अमेरिकी डॉलर यानी करीब 65 रूपए का एक पैकेट है। एक पैकेट में 10 दातून होते हैं। यानी एक दातून की कीमत 65 रूपए हैं, जो कि कॉलगेट के मुकाबले कई गुना ज्यादा महंगी बिकती है जबकि इसकी लागत कुछ भी नहीं है। यानी हींग लगे ना फिटकरी, रंग भी चोखा।
भारत में क्या स्थिति है।
भारत में जो लोग अपनी सेहत को लेकर जागरूक है वो भी दातून से अपने दांत साफ करने लगे हैं। उनको ये दातून चौराहों, रेलवे स्टेशनों के किनारे दस रुपए के तीन मिल जाते हैं।
क्या खास है दातून में
नीम के दातून में अज़ाडेरेक्टिन (Azadirachtin) नामक प्राकृतिक रासायनिक तत्व होता है, जिसके जीवाणुओं से लड़ने की क्षमता को चिकित्सा जगत ने भी माना है। मुंह में खाने के अवशेषों के कारण सबसे ज्यादा कीटाणु पनपते हैं जो मसूड़ों और दातों से संबंधित तमाम बीमारियों का कारण बनते हैं, नीम का दातून इन सब से निपटने में कारगर है। पश्चिमी देशों ने यह बात समझ ली है।

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